संत कबीर दास जी द्वारा रचित चेतावनी दोहा | कबीरा ये माया बिलखनी

मन हर चीज़ के लिए तैयार रहता है… बस भजन के समय ही भटकने लगता है। ⚠️ कबीर साहेब कहते हैं — माया इतनी सूक्ष्म है कि जैसे ही मनुष्य भजन या नाम सुमिरन में बैठता है, उसी समय मन में: विचार, इच्छाएँ, आलस, चिंता और दुनियावी आकर्षण उठने लगते हैं। 📌 माया हमेशा बाहर से नहीं, कई बार भीतर के भटकाव से भी काम करती है। ✨ सच्चा साधक वही है जो बार-बार भटकने के बाद भी भजन में लौट आता है। 👉 क्या आपके साथ भी ऐसा होता है? 👉 इस विचार को सेव करें 👉 ऐसे और चिंतन के liye follow @maanavtan13 #KabirVani #Bhajan

संत कबीर दास जी द्वारा रचित चेतावनी दोहा | कबीरा ये माया बिलखनी

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मन हर चीज़ के लिए तैयार रहता है… बस भजन के समय ही भटकने लगता है। ⚠️ कबीर साहेब कहते हैं — माया इतनी सूक्ष्म है कि जैसे ही मनुष्य भजन या नाम सुमिरन में…

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