🌸 “आख़िरी चिट्ठी” लखनऊ के एक छोटे से घर में रवि अपनी माँ के साथ रहता था। पिता का देहांत बचपन में ही हो गया था। माँ ने लोगों के घरों में काम करके उसे पढ़ाया-लिखाया। रवि हमेशा सोचता था — “एक दिन मैं बड़ा आदमी बनूँगा और माँ को आराम दूँगा।” समय बीता। मेहनत रंग लाई। उसे नौकरी मिल गई — वो भी दूर शहर में। माँ की आँखों में खुशी थी, पर दिल में हल्की सी उदासी। रवि शहर चला गया। काम में इतना व्यस्त हो गया कि माँ से बात करने का समय कम होता गया। माँ रोज़ शाम दरवाज़े पर बैठती और फोन का इंतज़ार करती। एक दिन रवि को ऑफिस में खबर मिली — “आपकी माँ की तबीयत बहुत खराब है।” वह तुरंत घर पहुँचा… लेकिन देर हो चुकी थी। माँ जा चुकी थीं। तकिए के नीचे एक चिट्ठी मिली। काँपते हाथों से उसने पढ़ा — “बेटा, मुझे तुम पर गर्व है। बस एक बात का दुख है… तुम बहुत दूर चले गए। पैसे कमाना ज़रूरी है, पर अपने लोगों को समय देना उससे भी ज़्यादा ज़रूरी है। खुश रहना… यही मेरी आख़िरी दुआ है।” रवि फूट-फूटकर रो पड़ा। उसे समझ आया — सफलता बड़ी नहीं होती, अपने लोग बड़े होते हैं। 💔 सीख: माँ-बाप का साथ अनमोल होता है। काम ज़रूरी है, पर परिवार उससे भी ज़्यादा ज़रूरी है। “कल” का भरोसा मत करो… जो कहना है, आज कह दो।
🌸 “आख़िरी चिट्ठी” लखनऊ के एक छोटे से घर में रवि अपनी माँ के साथ रहता था। पिता का देहांत बचपन में ही हो गया था। माँ ने लोगों के घरों में काम करके उसे पढ़ाया-लिखाया। रवि हमेशा सोचता था — “एक दिन मैं बड़ा आदमी बनूँगा और माँ को आराम दूँगा।” समय बीता। मेहनत रंग लाई। उसे नौकरी मिल गई — वो भी दूर शहर में। माँ की आँखों में खुशी थी, पर दिल में हल्की सी उदासी। रवि शहर चला गया। काम में इतना व्यस्त हो गया कि माँ से बात करने का समय कम होता गया। माँ रोज़ शाम दरवाज़े पर बैठती और फोन का इंतज़ार करती। एक दिन रवि को ऑफिस में खबर मिली — “आपकी माँ की तबीयत बहुत खराब है।” वह तुरंत घर पहुँचा… लेकिन देर हो चुकी थी। माँ जा चुकी थीं। तकिए के नीचे एक चिट्ठी मिली। काँपते हाथों से उसने पढ़ा — “बेटा, मुझे तुम पर गर्व है। बस एक बात का दुख है… तुम बहुत दूर चले गए। पैसे कमाना ज़रूरी है, पर अपने लोगों को समय देना उससे भी ज़्यादा ज़रूरी है। खुश रहना… यही मेरी आख़िरी दुआ है।” रवि फूट-फूटकर रो पड़ा। उसे समझ आया — सफलता बड़ी नहीं होती, अपने लोग बड़े होते हैं। 💔 सीख: माँ-बाप का साथ अनमोल होता है। काम ज़रूरी है, पर परिवार उससे भी ज़्यादा ज़रूरी है। “कल” का भरोसा मत करो… जो कहना है, आज कह दो।